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तोरी की खेती ने बदली हरियाणा के किसान की क़िस्मत, नाममात्र खर्च पर कमा रहा 50 हजार रुपए तक मुनाफा

परंपरागत खेती को छोड़ अब हरियाणा के किसान ऑर्गेनिक और बागवानी फसलों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। सरकार की प्रोत्साहन नीति और बाजार में सब्जियों की बढ़ती मांग ने किसानों के लिए नए अवसर खोल दिए हैं। कुछ ऐसा ही उदाहरण देखने को मिला है फरीदाबाद के ऊंचा गांव में, जहां किसान रोहतास ने तोरी की खेती से सिर्फ आधे एकड़ में 50 हजार रुपये का मुनाफा कमाकर सभी को चौंका दिया।

फरीदाबाद (हरियाणा): किसान रोहतास ने बताया कि उन्होंने तोरी की खेती पर केवल 10 हजार रुपये की लागत लगाई थी। फसल तैयार होने में लगभग डेढ़ महीने का समय लगा और इसकी बिक्री से उन्हें लागत से पांच गुना तक लाभ हुआ। खास बात ये है कि तोरी की फसल लंबी चलती है और सीजन के शुरुआत में इसके अच्छे दाम मिलते हैं।

तोरी की इस कामयाबी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पारंपरिक खेती छोड़कर अगर किसान स्मार्ट तरीके से सब्जी और बागवानी की ओर बढ़ें तो कम ज़मीन और लागत में भी बेहतर मुनाफा कमाया जा सकता है। रोहतास जैसे किसान अब दूसरों को भी यही सलाह दे रहे हैं कि खेती में बदलाव ही आगे बढ़ने का रास्ता है।

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ऐसे होती है तोरी की खेती, जानिए तरीका और खर्च

किसान रोहतास के मुताबिक, उन्होंने आधा एकड़ खेत में एक किलो तोरी का बीज डाला। इसकी कीमत लगभग 5 हजार रुपये प्रति किलो थी। खेती से पहले खेत की 2-3 बार जुताई की गई और पौधों के बीच 8 इंच की दूरी रखी गई, जिससे हर पौधे को पर्याप्त पोषण और जगह मिल सके।

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तोरी की खेती में पानी और देखभाल की जरूरत होती है, लेकिन अगर शुरुआत में सही प्रबंधन किया जाए तो यह फसल खुद-ब-खुद अच्छा रिजल्ट देती है। फसल जब मंडी में जाती है तो शुरुआत में इसका दाम अच्छा मिलता है। जैसे-जैसे सीजन बढ़ता है, दाम थोड़ा कम होता है, लेकिन फसल लंबी चलने के कारण लागत आसानी से निकल जाती है और 50 हजार तक की कमाई हो जाती है।

खेती छोड़ो नहीं, तरीका बदलो

रोहतास कहते हैं कि खेती ही उनके जीवन की रीढ़ है, और इसी पर उनका परिवार टिका है। उनका मानना है कि अगर किसान परंपरागत गेहूं-धान चक्र से बाहर निकलकर सब्जियों और नकदी फसलों की तरफ बढ़ें, तो कम समय में ज़्यादा फायदा मिल सकता है।

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