हरियाणा

करनाल में डॉक्टर से कथित मारपीट का मामला गरमाया, SHO निलंबित — विरोध में डॉक्टरों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं ठप

हरियाणा के करनाल जिले में एक सरकारी डॉक्टर के साथ कथित बदसलूकी और मारपीट के आरोपों ने पुलिस-प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के बीच टकराव को जन्म....

हरियाणा के करनाल जिले में एक सरकारी डॉक्टर के साथ कथित बदसलूकी और मारपीट के आरोपों ने पुलिस-प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के बीच टकराव को जन्म दे दिया है। घरौंडा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में तैनात डॉक्टर के साथ हुई घटना के बाद जिले के सरकारी डॉक्टरों ने विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी, जिससे अस्पतालों की अधिकांश स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो गई हैं।

क्या है पूरा मामला

बताया जा रहा है कि यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब घरौंडा CHC में होली के दौरान घायल मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई। अस्पताल में भीड़ और अव्यवस्था को देखते हुए ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने थाना प्रभारी (SHO) को फोन कर अतिरिक्त पुलिस बल भेजने का अनुरोध किया। इसी दौरान फोन पर दोनों के बीच तीखी बहस हो गई।

आरोप है कि इसके कुछ देर बाद SHO पुलिसकर्मियों के साथ अस्पताल पहुंचे और डॉक्टर के साथ अभद्र व्यवहार किया। डॉक्टर का कहना है कि उन्हें अस्पताल परिसर से जबरन गाड़ी में बैठाकर थाने ले जाया गया। इस घटना का एक वीडियो और CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें SHO को डॉक्टर को थप्पड़ मारते हुए देखा जा रहा है।

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डॉक्टरों का विरोध और हड़ताल

घटना के विरोध में जिले के करीब 200 सरकारी डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक संबंधित SHO और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज नहीं की जाती, तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। इस आंदोलन को हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (HCMSA), इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों का भी समर्थन मिल रहा है।

हड़ताल के चलते ओपीडी, लैब जांच, प्रसूति सेवाएं, पोस्टमार्टम और यहां तक कि कई जगह इमरजेंसी सेवाएं भी प्रभावित हो गई हैं। इससे मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

प्रशासन की कार्रवाई

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मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने SHO को निलंबित कर दिया है और पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वहीं डॉक्टरों का कहना है कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होना जरूरी है, ताकि भविष्य में चिकित्सा कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

मरीजों की बढ़ी मुश्किलें

इस विवाद का सबसे बड़ा असर आम मरीजों पर पड़ रहा है। कई मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे लेकिन डॉक्टरों की हड़ताल के कारण उन्हें बिना इलाज लौटना पड़ा। प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए सेवाएं बहाल करने की कोशिश कर रहा है, हालांकि हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं।

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