Vyomika Singh Biography: विंग कमांडर व्योमिका सिंह कौन हैं, जिन्होनें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में निभाई अग्रणी भूमिका
Wing Commander Vyomika Singh: भारतीय वायुसेना की बहादुर अधिकारी, विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आकाश की ऊंचाइयों पर महिलाओं का भी उतना ही अधिकार...

Vyomika Singh Biography: भारतीय वायुसेना की बहादुर अधिकारी, विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आकाश की ऊंचाइयों पर महिलाओं का भी उतना ही अधिकार है जितना पुरुषों का। हाल ही में पहलगाम हमले के जवाब में किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में उनकी अग्रणी भूमिका ने देश को गौरव से भर दिया। न केवल उन्होंने इस संवेदनशील मिशन में हिस्सा लिया, बल्कि पहली बार एक महिला अधिकारी के रूप में मीडिया ब्रीफिंग की अगुवाई कर मिसाल कायम की।
व्योमिका सिंह एक अनुभवी हेलीकॉप्टर पायलट हैं, जिनके नाम 2,500 से भी ज्यादा उड़ान घंटे दर्ज हैं। उन्होंने चेतक और चीता जैसे हेलीकॉप्टरों के साथ भारत के सबसे कठिन इलाकों में उड़ानें भरी हैं — कभी कश्मीर की ऊंची पहाड़ियों में तो कभी अरुणाचल की तंग घाटियों में। उनके अभियान सिर्फ हेलीकॉप्टर उड़ाने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने जटिल बचाव और राहत अभियानों की कमान भी संभाली है।
उनकी यह प्रेरणादायक यात्रा बचपन के एक सपने से शुरू हुई थी, जब उन्होंने छठी कक्षा में तय किया कि उन्हें ‘व्योमिका’— यानी ‘आसमान में रहने वाली’— नाम को सार्थक करना है। आज वह न केवल अपने नाम के अनुरूप उड़ रही हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी अपने पंख फैलाने की प्रेरणा दे रही हैं।
Vyomika Singh Biography in Hindi

जब कोई बच्चा कहता है कि वह बड़ा होकर पायलट बनेगा, तो अक्सर यह एक मासूम सी कल्पना लगती है। लेकिन विंग कमांडर व्योमिका सिंह के लिए यह सपना नहीं, बल्कि एक संकल्प था — और उन्होंने यह संकल्प इतने साहस, कौशल और गरिमा के साथ पूरा किया कि आज उनका नाम भारतीय वायुसेना की प्रमुख महिलाओं में शुमार है।
शुरुआत जहां सपनों ने उड़ान भरी
व्योमिका की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं लगती। उनके नाम का मतलब है — “आकाशवासी”, और उन्होंने अपने नाम को ही अपनी मंज़िल बना लिया। छठी कक्षा में जब बच्चे आमतौर पर किताबों से लड़ रहे होते हैं, उस उम्र में व्योमिका आसमान से लड़ने की ठान चुकी थीं। एनसीसी में शामिल होकर उन्होंने अपने पंखों को दिशा दी और फिर इंजीनियरिंग की पढ़ाई के साथ अपने परिवार की पहली महिला बनीं जो सशस्त्र बलों में शामिल हुईं।
करियर की ऊंचाइयों पर उड़ान
2019 में भारतीय वायुसेना की उड़ान शाखा में उन्हें स्थायी कमीशन मिला। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। चेतक और चीता जैसे हेलीकॉप्टरों की कमान संभालते हुए उन्होंने देश के ऐसे दुर्गम इलाकों में उड़ान भरी, जहाँ सिर्फ तकनीक नहीं, हौसला भी काम आता है। जम्मू-कश्मीर की ऊंची चोटियों से लेकर पूर्वोत्तर के सघन जंगलों तक, व्योमिका ने हर चुनौती को अपने पंखों से कुचल दिया।
उनके अभियान सिर्फ सैन्य अभ्यास नहीं थे — वे जीवन रक्षक मिशन थे। नवंबर 2020 में अरुणाचल प्रदेश में एक खतरनाक बचाव मिशन के दौरान उन्होंने खराब मौसम की परवाह किए बिना अपने दल का नेतृत्व किया और कई लोगों की जान बचाई। 2021 में उन्होंने 21,650 फीट की ऊंचाई पर माउंट मणिरंग पर महिलाओं के एक विशेष सैन्य पर्वतारोहण अभियान में हिस्सा लिया — और इसमें उनका उत्साह उतना ही ऊंचा था जितनी वह चोटी।
सम्मान जो सिर्फ मेडल नहीं, मिशन का प्रतीक हैं
व्योमिका सिंह को वायुसेना प्रमुख और एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ द्वारा उनकी उत्कृष्ट सेवा और वीरता के लिए विशेष प्रशंसा प्राप्त हुई है। यह सिर्फ एक औपचारिक सम्मान नहीं, बल्कि आने वाली महिला अधिकारियों के लिए एक संदेश है — कि अगर आपमें जज़्बा है, तो वर्दी सिर्फ एक पोशाक नहीं, बल्कि सम्मान का प्रतीक बन सकती है।
ऑपरेशन सिंदूर
7 मई 2025 की सुबह, जब देश पहलगाम हमले से गमगीन था, तब भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के रूप में आतंकवाद को करारा जवाब दिया। यह मिशन पाकिस्तान और पीओके में स्थित नौ आतंकी ठिकानों को लक्षित कर, बिना युद्ध का विस्तार किए आतंक के केंद्रों को ध्वस्त करने की एक रणनीतिक कार्रवाई थी। इस मिशन की मीडिया ब्रीफिंग में विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने कर्नल सोफिया कुरैशी के साथ मंच साझा किया — यह सशस्त्र बलों के इतिहास में महिलाओं की भूमिका में एक नया अध्याय था।
मॉक ड्रिल
वायुसेना में नियमित तौर पर मॉक ड्रिल्स आयोजित होती हैं — ये ड्रिल युद्ध जैसी परिस्थितियों का वास्तविक अभ्यास होती हैं, जिससे जवानों की तत्परता बनी रहती है। ऑपरेशन सिंदूर भी ऐसे ही पूर्वाभ्यासों का नतीजा था। व्योमिका की रणनीतिक सोच और पायलटिंग स्किल्स ने यह सुनिश्चित किया कि जवाबी कार्रवाई तेज़, सटीक और सीमित रहे।